
बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन है। इस मंदिर का निर्माण गुप्त काल में किया गया था, लेकिन इसके आसपास की प्राचीनतम प्रमाणित उपकरणों और मंदिरों के अनुसार इसकी स्थापना का समय संभवतः दशहरे जैसी विशेष पर्व के दौरान रखा जाता है।
मंदिर का निर्माण अदिग्रह में बसे राजा अनिरुद्ध द्वारा किया गया था, जिसने यहां पहले भगवान विष्णु के एक प्रतिमा की स्थापना की थी। इसके बाद से बद्रीनाथ मंदिर ने यात्राओं को आकर्षित करने वाले तीर्थस्थल के रूप में महत्त्व प्राप्त किया। यहां की प्रतिमा बद्रीनाथ के रूप में पूजी जाती है, जो महाभारत के युद्ध के समय पांडवों के योधा भगवान कृष्ण के रूप में अवतरित हुए थे।
इसके अलावा, बद्रीनाथ मंदिर ने इतिहास में कई बार तबाही और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को भी देखा है। मंदिर को बार-बार ध्वस्त होने से बचाने के लिए इसे बार-बार सुधारा और नवीनीकृत किया गया है |
आजकल के बद्रीनाथ मंदिर में नवीनीकरण के कार्य जारी हैं और इसे सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए अनेक परियोजनाएं आयोजित की जा रही हैं। इनमें मंदिर की संरचना, परिसर की सुविधाओं का विस्तार और भक्तों के लिए आवास व्यवस्था की सुधार शामिल है। इसके साथ ही, भक्तों के लिए यात्रा की सुविधा, प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा के मामले में भी सुधार किए जा रहे हैं।यह मंदिर विश्वासियों के लिए धार्मिक महत्त्व का केंद्र है और वार्षिक तीर्थयात्रियों का आदर्श स्थल है। इसके चारों ओर के पर्वतीय दृश्य और नजारे इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी बनाते हैं। इसका संगठन और प्रबंधन उत्तराखंड सरकार द्वारा किया जाता है और यह संपूर्ण वर्ष में यात्रियों के लिए खुला रहता है।यह भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्त्वपूर्ण प्रतीक है और लोग यहां पूजा और ध्यान के लिए आते हैं। बद्रीनाथ मंदिर देवभूमि उत्तराखण्ड की सुंदरता, शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक है और यहां जाने वाले लोग इसकी मान्यता और महत्व को महसूस करते हैं।